आरती के बोल
ओम जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा।
भक्तन के प्रतिपालक, दीनन दुख हरणा॥ ओम जय लक्ष्मी रमणा॥
चार वेद गुण गावत, ध्यान पुराण धरें।
ब्रह्मादिक शिव शारद, स्तुति नित्य करें॥ ओम जय लक्ष्मी रमणा॥
लक्ष्मीपति, कमलापति, गरूड़ासन स्वामी।
शेष शयन तुम करते, प्रभु अन्तरयामी॥ ओम जय लक्ष्मी रमणा॥
मात-पिता हो जग के, सुर नर मुनि करते सेवा।
धूप, दीप, तुलसीदल, धरें भोग मेवा॥ ओम जय लक्ष्मी रमणा॥
रत्नमुकुट सिर सौहे, बैजन्ती माला।
पीताम्बर तन शोभित, नील वरण आला॥ ओम जय लक्ष्मी रमणा॥
शंख-चक्र कर सौहे मुद मंगलकारी।
दास प्रभु की विनती सुन लो हितकारी॥ ओम जय लक्ष्मी रमणा॥
भक्तन के प्रतिपालक, दीनन दुख हरणा॥ ओम जय लक्ष्मी रमणा॥
चार वेद गुण गावत, ध्यान पुराण धरें।
ब्रह्मादिक शिव शारद, स्तुति नित्य करें॥ ओम जय लक्ष्मी रमणा॥
लक्ष्मीपति, कमलापति, गरूड़ासन स्वामी।
शेष शयन तुम करते, प्रभु अन्तरयामी॥ ओम जय लक्ष्मी रमणा॥
मात-पिता हो जग के, सुर नर मुनि करते सेवा।
धूप, दीप, तुलसीदल, धरें भोग मेवा॥ ओम जय लक्ष्मी रमणा॥
रत्नमुकुट सिर सौहे, बैजन्ती माला।
पीताम्बर तन शोभित, नील वरण आला॥ ओम जय लक्ष्मी रमणा॥
शंख-चक्र कर सौहे मुद मंगलकारी।
दास प्रभु की विनती सुन लो हितकारी॥ ओम जय लक्ष्मी रमणा॥